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(कृष्णा वार्ता gadarpur उत्तराखंड)

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के दिल्ली स्थित आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित चाकू से हमले और हंगामे के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। पप्पू यादव और उनके वकील ने इसे सुनियोजित हत्या की साजिश बताते हुए दिल्ली पुलिस पर सुरक्षा में लापरवाही और सत्तारूढ़ दल के साथ मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है।

पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव के दिल्ली स्थित आवास पर रविवार को कथित चाकू से हमले की घटना सामने आई। यह घटना राम मंदिर स्किट विवाद के बीच हुई, जिसके बाद पप्पू यादव के वकील ने दिल्ली पुलिस पर सत्तारूढ़ दल के साथ ‘मिलीभगत’ का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पहले से शिकायतें देने के बावजूद सांसद को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई। यह घटना उस समय हुई जब पप्पू यादव अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों और उनके समर्थकों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि यह उन्हें मारने की सुनियोजित साजिश थी।

क्या दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा देने में लापरवाही बरती?

कथित सुरक्षा चूक पर प्रतिक्रिया देते हुए पप्पू यादव के वकील ने आरोप लगाया कि लगातार मिल रही धमकियों की जानकारी देने के बावजूद दिल्ली पुलिस ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। उन्होंने एएनआई से कहा, ‘यह दिल्ली पुलिस की विफलता को उजागर करता है। इससे साफ पता चलता है कि दिल्ली पुलिस सत्तारूढ़ दल के साथ मिलीभगत कर एक छह बार के निर्वाचित सांसद के खिलाफ रची जा रही साजिश को बढ़ावा दे रही है। पिछले दो दिनों से हम लगातार शिकायतें दर्ज करा रहे थे कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है। सोशल मीडिया पर खुलेआम ऐसे पोस्ट किए जा रहे हैं, जिनमें उनका सिर काटने वाले को 51 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की गई है।’

दिल्ली पुलिस नहीं कर रही सुरक्षा’

वकील ने आरोप लगाया कि सुरक्षा के पर्याप्त आश्वासन के बावजूद पुलिस ने बेहद कम संख्या में जवान तैनात किए। बार-बार शिकायत करने और दिल्ली पुलिस से पूरी सुरक्षा का आश्वासन मिलने के बावजूद वहां केवल तीन-चार पुलिसकर्मी तैनात किए गए। उनमें भी सिर्फ एक इंस्पेक्टर मौजूद था। मीडिया की मौजूदगी के बीच लोगों ने चाकू लहराया और इस तरह की हरकतें कीं। यह बेहद निंदनीय और अमानवीय है। अब हम आगे कानूनी कार्रवाई करेंगे। 

घटनास्थल पर मौजूद मीडिया संयोजक ने क्या दावा किया?

घटना के दौरान मौजूद पप्पू यादव के मीडिया संयोजक ने दावा किया कि हमलावरों को रोकने के दौरान उन्हें बुरी तरह पीटा गया और वे बेहोश हो गए। उन्होंने एएनआई से कहा, ‘हमलावरों ने पहले चप्पल फेंकी। इसके बाद जब चाकू निकालकर हमला करने की कोशिश की गई तो हमारे समर्थकों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। मैं पप्पू यादव और हमलावर के बीच आकर खड़ा हो गया, जिसके कारण मुझे बुरी तरह पीटा गया। दिल्ली पुलिस तमाशबीन बनी रही। मैंने पप्पू यादव को वहां से निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस गुंडों को बचाती हुई दिखाई दी। दो-तीन लोगों ने मुझे इतना पीटा कि मैं बेहोश हो गया।’ 

हमलावरों को लेकर पुलिस पर क्या आरोप लगाए गए?

मीडिया संयोजक ने आगे दावा किया कि हमलावरों को पुलिस अपने साथ ले गई और उन्हें नहीं बताया गया कि कितने लोगों को हिरासत में लिया गया। मेरे साथियों ने मुझे वहां से हटाया। इसके बाद क्या हुआ, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। दिल्ली पुलिस हमलावरों को अपने साथ ले गई, इसलिए वही बता सकती है कि कितने लोग थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पहले ही पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) से मिलकर सोशल मीडिया पर मिल रही धमकियों की शिकायत की थी।

पप्पू यादव ने इसे हत्या की साजिश क्यों बताया?

घटना के बाद पत्रकारों से बातचीत में पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि उन्हें मारने की साजिश रची गई थी और उनके सिर की कीमत घोषित की गई है। हमने हमलावर को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। मुझे मारने की साजिश थी, लेकिन मैं बच गया। 

मैंने कौन-सा अपराध किया? 

पप्पू यादव ने कहा कि उन्होंने केवल राम मंदिर में आए चंदे को लेकर सवाल उठाए थे और इसी कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। अगर वहां लोग नहीं होते तो आज मैं बच नहीं पाता। मैंने कुछ गलत नहीं कहा। मैंने सिर्फ चंपत राय और गिरी से पूछा था कि 200 किलो चांदी कहां गई? सोना कहां गया? दिल्ली पुलिस पूरी तरह सक्षम है। मैं लंबे समय से सुरक्षा की मांग कर रहा हूं। आखिर मैंने कौन-सा अपराध किया है?

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