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(कृष्णा वार्ता गदरपुर उत्तराखंड)

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में गहराते युद्ध के संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बड़ी इमरजेंसी बैठक बुलाई. पीएम आवास पर करीब साढ़े तीन घंटे चली इस हाई-लेवल मीटिंग में सीनियर कैबिनेट मंत्रियों के साथ कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर की सप्लाई चेन की समीक्षा की गई. सरकार का मुख्य फोकस युद्ध के बीच देश में ईंधन और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है. इस उच्च स्तरीय बैठक में गृह मंत्री, वित्त मंत्री, विदेश मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री सहित कई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और शीर्ष अधिकारी शामिल रहे।

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बैठक में क्या-क्या हुई चर्चा?

कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार के सभी अंग सही नजरिया अपनाकर नागरिकों को इस संकट के प्रभाव से सुरक्षित रखें. बैठक में भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा पर चर्चा हुई. किसानों के लिए खरीफ सीजन के लिए खाद की आवश्यकता का आकलन किया गया. PM ने आश्वस्त किया कि पिछले सालों में बनाए गए स्टॉक के कारण खाद की कोई कमी नहीं होगी. भविष्य के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा हुई. इसके अलावा देश के सभी पावर प्लांटों में कोयले का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने का फैसला लिया गया, ताकि देश में बिजली की कोई किल्लत न हो।

कालाबाजारी और जमाखोरी पर नकेल

प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय के निर्देश दिए हैं ताकि युद्ध की आड़ में जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी न हो सके. उन्होंने कहा कि नागरिकों को कम से कम असुविधा होनी चाहिए।

PM मोदी ने इस संकट से निपटने के लिए एक डेडीकेटेड ‘ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स’ और सचिवों के समूह के गठन का निर्देश दिया है. यह समूह अलग-अलग सेक्टर के हितधारकों के साथ मिलकर काम करेगा।

व्यापार और उद्योगों के लिए नई रणनीति

युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं. कैमिकल, फार्मा और पेट्रोकेमिकल जैसे उद्योगों के लिए आयात के वैकल्पिक देशों की तलाश की जाएगी. भारतीय सामानों को बढ़ावा देने के लिए दुनिया के अन्य हिस्सों में नए एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन विकसित किए जाएंगे. इन क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए संबंधित मंत्रालय जल्द ही नई योजनाएं लागू करेंगे।

ईंधन और ऊर्जा आपूर्ति पर फोकस

बैठक का मुख्य उद्देश्य देश भर में निर्बाध आपूर्ति और कुशल वितरण सुनिश्चित करना है तथा सरकार इस दिशा में सक्रिय कदम उठा रही है. पीएम मोदी ने 12 मार्च को कहा था कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने विश्वव्यापी ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है जो राष्ट्रीय चरित्र की एक गंभीर परीक्षा है और इससे शांति, धैर्य एवं लोगों में अधिक जागरूकता के जरिये निपटने की जरूरत है. प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न व्यवधानों से निपटने के लिए लगातार काम कर रही . मोदी ने कहा था, ‘यह पता लगाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों से हम कैसे पार पा सकते हैं।

13 कैबिनेट मंत्री बैठक में मौजूद

पीएम हाउस पर हुई इस हाई लेवल मीटिंग में 13 कैबिनेट मंत्री भी मौजूद थे. इसमें गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पीयूष गोयल, हरदीप सिंह पुरी, प्रह्लाद जोशी, अश्विनी वैष्णव, के राम मोहन नायडू, जे पी नड्डा, सर्वानंद सोनोवाल, मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान शामिल थे. इसके अलावा बैठक में एनएसए अजीत डोभाल और पीएम के दोनों प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी मौजूद रहे।

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