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(कृष्णा वार्ता गदरपुर उत्तराखंड)

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच रूस ने दक्षिण एशियाई देशों को प्राकृतिक गैस पर बड़ा ऑफर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस अपने प्रतिबंधित संयंत्रों से एलएनजी (LNG) की खेप हाजिर कीमतों से करीब 40% तक की छूट पर बेचने की कोशिश कर रहा है। माना जा रहा है कि रूस इस संकट का फायदा उठाकर ऊर्जा की कमी से जूझ रहे देशों को आकर्षित करना चाहता है।

सूत्रों के अनुसार, यह डील चीन और रूस की कुछ मध्यस्थ कंपनियों के जरिए की जा रही है, जहां गैस को ऐसे दस्तावेजों के साथ पेश किया जा रहा है, जिससे यह लगे कि आपूर्ति ओमान या नाइजीरिया जैसे अन्य देशों से आ रही है। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन ऑफर्स के तहत किसी देश ने खरीदारी की है या नहीं।

वहीं दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और कतर के बड़े एलएनजी निर्यात संयंत्र पर हमलों के कारण वैश्विक गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और आपूर्ति बाधित हो गई है। भारत, जो अपनी एलएनजी जरूरतों का लगभग 50% कतर से आयात करता है, इस स्थिति से सीधे प्रभावित हो रहा है।

आपूर्ति में कमी के कारण भारत और बांग्लादेश जैसे देशों को उर्वरक क्षेत्र में गैस की आपूर्ति तक कम करनी पड़ी है। हालांकि भारत आमतौर पर प्रतिबंधित स्रोतों से तेल और गैस खरीदने में सतर्क रहता है, लेकिन हाल के वैश्विक हालात ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

ऐसे में रूस का यह डिस्काउंट ऑफर दक्षिण एशियाई देशों के लिए एक बड़ा मौका भी हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही भू-राजनीतिक और प्रतिबंधों से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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