(कृष्णा वार्ता gadarpur उत्तराखंड)
नई दिल्ली… दिल्ली में सरकारी सेवाओं में देरी अब अधिकारियों पर भारी पड़ सकती है। दिल्ली कैबिनेट ने ‘दिल्ली (राइट ऑफ सिटिजन टू टाइम बाउंड एंड ईज़ ऑफ डिलीवरी ऑफ सर्विस) बिल, 2026’ को मंजूरी दे दी है। यह नया विधेयक 2011 के मौजूदा कानून की जगह लेगा और सरकारी सेवाओं को तय समय में उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।
प्रस्तावित बिल के अनुसार, यदि कोई अधिकारी बिना उचित कारण किसी सरकारी सेवा में देरी करता है, तो उस पर ₹250 प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जा सकता है। यह जुर्माना अधिकतम ₹5,000 तक होगा। हालांकि, किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
दिल्ली सरकार इस विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश कर सकती है। वर्तमान 2011 के कानून में सेवा में देरी होने पर नागरिक को ₹10 प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम ₹200 तक मुआवजा देने का प्रावधान था। नए बिल में अधिकारियों की जवाबदेही को और अधिक सख्त बनाने का प्रस्ताव है।
हाल ही में दिल्ली सरकार ने 23 नई सेवाओं को भी समयबद्ध सेवा व्यवस्था में शामिल किया है, जिसके बाद इस कानून के दायरे में आने वाली सरकारी सेवाओं की संख्या 500 से अधिक हो गई है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य हर नागरिक को निर्धारित समय सीमा के भीतर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना, विभागों और अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाना तथा प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सरल, प्रभावी और तकनीक आधारित बनाना है। सरकार समय-समय पर अधिसूचना जारी कर यह भी तय करेगी कि किन सेवाओं पर यह कानून लागू होगा, उनकी समयसीमा क्या होगी और उनके लिए कौन-से अधिकारी जिम्मेदार होंगे।






