


(कृष्णा वार्ता गदरपुर उत्तराखंड)
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के शैक्षणिक संस्थानों से अपील की है कि मौजूदा ऊर्जा संकट और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए स्कूलों और कॉलेजों में अस्थायी रूप से ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था पर विचार किया जाए। वडोदरा में सारदारधाम हॉस्टल कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को इस दशक के “बड़े संकटों” में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि जिस तरह देश ने कोविड-19 महामारी का सामना डिजिटल माध्यमों से किया था, उसी तरह इस ऊर्जा संकट से भी सामूहिक प्रयास और तकनीक के जरिए निपटा जा सकता है। पीएम मोदी के अनुसार स्कूल बसों और निजी वाहनों की आवाजाही कम होने से ईंधन की खपत घटेगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कॉर्पोरेट सेक्टर में वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने, सार्वजनिक परिवहन जैसे मेट्रो और इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग, कारपूलिंग को अपनाने और नागरिकों से सोने की खरीद को टालने जैसी अपीलें भी की हैं, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखा जा सके।
हालांकि इस सुझाव पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ शिक्षाविदों ने इसे डिजिटल शिक्षा के बेहतर उपयोग की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है, जबकि विपक्ष का कहना है कि इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए डिजिटल डिवाइड और बढ़ सकता है।
फिलहाल यह केवल एक सुझाव है और इसे लागू करने का कोई अनिवार्य आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन कई राज्य सरकारें और शिक्षा बोर्ड इस पर विचार कर रहे हैं।
