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(कृष्णा वार्ता गदरपुर उत्तराखंड)

काशीपुर। काशीपुर नगर निगम के महापौर दीपक बाली ने आज गदरपुर के विधायक अरविंद पांडे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नगर निगम सभागार में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महापौर बाली ने पांडे पर गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य की राजनीति में चल रही खींचतान, आंतरिक असंतोष और कथित साजिशों पर खुलकर बात की।

विकास कार्यों में बाधा और षड्यंत्र का आरोप महापौर बाली ने आरोप लगाया कि एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चल रहे विकास कार्यों को रोकने के लिए छल, प्रपंच और षड्यंत्रों का सहारा ले रहा है। उन्होंने कहा कि वे जनता और मीडिया के सामने इसलिए आए हैं, ताकि तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट की जा सके। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी संगठन ने जिस भरोसे के साथ उन्हें नेतृत्व सौंपा है, उसे कमजोर करने के प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इससे कार्यकर्ताओं के मन में पीड़ा पैदा होती है।

बाली ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक अनुशासित और विशाल संगठन है, जहां नेतृत्व क्षमता और कार्यकुशलता के आधार पर जिम्मेदारियां दी जाती हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चुनाव हारे नहीं थे, बल्कि परिस्थितियों और भीतरखाने की गतिविधियों के कारण उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने परिवार की तरह एकजुट होकर उनके कंधों पर भरोसा रखा और प्रदेश की बागडोर सौंपी। महापौर के अनुसार यह भरोसा संगठन की परिपक्वता और दूरदृष्टि का प्रमाण था, लेकिन कुछ लोगों को यह निर्णय रास नहीं आया। ऐसे तत्वों ने स्वयं को पार्टी का हिस्सा मानने के बजाय विपक्ष की भूमिका में खड़ा कर लिया और लगातार आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि दिन-रात काम करने वाले युवा मुख्यमंत्री को सीधा रोकने के बजाय साजिशों के जरिए बाधाएं खड़ी की जा रही हैं, जो न केवल अनुचित है बल्कि जनता के साथ भी विश्वासघात है।

अंकिता प्रकरण पर राजनीति का आरोप दीपक बाली ने अंकिता प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि वह उत्तराखंड की बेटी थी और उसकी पीड़ा पूरे समाज की पीड़ा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेसियों के साथ-साथ पार्टी के भीतर के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी इस दुखद घटना पर राजनीति करने से परहेज नहीं किया। महापौर के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीड़ित परिवार से मिलकर उनकी बात सुनी, उनकी मांग पर सीबीआई जांच का निर्णय लिया और न्याय का भरोसा दिया। इसके बावजूद कुछ लोग लगातार भ्रम फैलाने का काम करते रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में राजनीति नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और एकजुटता की आवश्यकता थी। लेकिन दुर्भाग्य से, घटनाओं को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया और सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए गए। महापौर ने स्पष्ट किया कि विकास और न्याय के रास्ते में अवरोध पैदा करने वालों की मंशा जनता समझ चुकी है और ऐसे प्रयास लंबे समय तक सफल नहीं हो सकते।

विधायक अरविंद पांडे पर सीधा हमला वार्ता के दौरान महापौर ने विधायक अरविंद पांडे के बयानों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अरविंद पांडे एक वरिष्ठ नेता हैं, उनकी वरिष्ठता और अनुभव पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन बार-बार ऐसे बयान देना जो भ्रम पैदा करें, स्वीकार्य नहीं है। किसान सुखवंत सिंह की दुखद मृत्यु का जिक्र करते हुए महापौर ने कहा कि यह घटना पूरे समाज को झकझोर देने वाली है। मुख्यमंत्री ने तत्काल संज्ञान लेकर परिवार को दिलासा दिया और न्याय का भरोसा दिया, लेकिन अरविंद पांडे द्वारा काशीपुर आकर दिए गए विरोधाभासी बयान सवाल खड़े करते हैं। कभी सीबीआई जांच की मांग और फिर यह कहना कि हर मामले में सीबीआई जरूरी नहीं, यह दोहरा रवैया है। उन्होंने पूछा कि क्या शोक व्यक्त करने के नाम पर भी राजनीति की जा रही है। महापौर ने यह भी कहा कि संगठनात्मक जिम्मेदारियों के समय अरविंद पांडे की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठते हैं।

काशीपुर को राजनीतिक अखाड़ा बनाने का आरोप दीपक बाली ने काशीपुर के संदर्भ में कहा कि यह शहर शांतप्रिय है और इसकी फिजा को राजनीति के कारण अशांत नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि अरविंद पांडे को काशीपुर से इतना ही लगाव है, तो वे नगर निगम कार्यालय आकर जनता की समस्याएं सुनें और समाधान में सहभागी बनें। रोजाना सैकड़ों लोग नगर निगम में अपनी समस्याएं लेकर आते हैं और उनका निवारण किया जाता है। केवल राजनीतिक लाभ के लिए शहर में आकर माहौल बनाना उचित नहीं है। महापौर ने आरोप लगाया कि बार-बार काशीपुर को राजनीतिक अखाड़ा बनाने की कोशिश हो रही है, जबकि वास्तविक मुद्दों पर काम करने की इच्छाशक्ति का अभाव है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुषकर सिंह धामी और उनकी सरकार को कमजोर करने की कोशिशें अब बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

धृतराष्ट्र का उदाहरण और वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी पर सवाल प्रेस वार्ता में महापौर ने भावनात्मक उदाहरण देते हुए महाभारत के पात्र धृतराष्ट्र का उल्लेख किया और कहा कि पुत्र मोह में आंख मूंदकर गलत को देखना भी एक तरह की चूक होती है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि जिन वरिष्ठ नेताओं को अरविंद पांडे अपने पिता समान मानते हैं, वे आज इस पूरे घटनाक्रम पर चुप क्यों हैं। बलराज पासी जैसे वरिष्ठ नेता यदि गदरपुर में होने वाले कथित शक्ति प्रदर्शन के मंच पर दिखाई नहीं दिए, तो इसका अर्थ यही है कि वे इन गतिविधियों से सहमत नहीं हैं। महापौर ने कहा कि पार्टी को सींचने वाले वरिष्ठ नेताओं को आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि कार्यकर्ताओं में भ्रम न रहे। उन्होंने यह भी कहा कि लड़ाई जनता के हितों की नहीं, बल्कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की प्रतीत हो रही है, जो संगठन के लिए घातक है।

नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दीपक बाली ने साफ शब्दों में कहा कि यदि अरविंद पांडे को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व से समस्या है, तो वह सीधे तौर पर कहे, घुमा-फिराकर बयान देने से स्थिति और बिगड़ती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उम्र और अनुभव का हवाला देकर नेतृत्व परिवर्तन की बातों को हवा दे रहे हैं, जबकि पार्टी संगठन ने सोच-समझकर निर्णय लिया है। महापौर ने कहा कि 2027 का चुनाव धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा और जनता की भावनाएं स्पष्ट हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश की जनता दोबारा भारतीय जनता पार्टी की सरकार चाहती है और मुख्यमंत्री के रूप में फिर से पुष्कर सिंह धामी को देखना चाहती है। यह किसी व्यक्ति विशेष की राय नहीं, बल्कि जनभावनाओं का प्रतिबिंब है।

अतिक्रमण नोटिस पर राजनीतिक ड्रामा का आरोप प्रेस वार्ता में अतिक्रमण नोटिस और सरकारी जमीन से जुड़े मुद्दे पर भी महापौर ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि किसी को नोटिस मिला है और उसमें त्रुटियां हैं, तो उसे कानूनी और संगठनात्मक मंच पर सुलझाया जाना चाहिए, न कि सड़कों पर टेंट लगाकर राजनीतिक ड्रामा किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि गदरपुर में मंच सजाकर माहौल बनाने की कोशिश की गई, लेकिन पार्टी संगठन के हस्तक्षेप से वह प्रयास सफल नहीं हो सका। महापौर ने कहा कि चार-पांच साल से सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें चल रही हैं और अब कार्यकर्ता चुप रहने के मूड में नहीं हैं। यदि संगठन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो जमीनी स्तर पर असंतोष बढ़ सकता है।

कांग्रेस पर निशाना कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए दीपक बाली ने कहा कि हर मुद्दे को मुख्यमंत्री से जोड़कर राजनीतिक लाभ उठाने की आदत बन चुकी है। उन्होंने रुद्रपुर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब सच्चाई सामने आई, तो कांग्रेस नेताओं को माफी मांगनी पड़ी। इसके बावजूद पहले चरण में पुलिस और सरकार को निशाना बनाया गया। महापौर ने कहा कि सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में भी कांग्रेस का उद्देश्य परिवार को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि राजनीतिक फायदा उठाना प्रतीत होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भी भाजपा नेता कांग्रेस के हाथों की कठपुतली बनकर सरकार को कमजोर करने का प्रयास करेगा, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियों का जिक्र महापौर ने सोशल मीडिया पर चलने वाले अभियानों का भी जिक्र किया और कहा कि जैसे ही ऐसी खबरें आती हैं, एक खास गिरोह सक्रिय होकर नकारात्मक टिप्पणियां करने लगता है। उन्होंने कहा कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उनका काम जनता ने विकास के लिए चुना है। काशीपुर में हो रहे विकास कार्यों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जब शहर की जनता स्वयं कहेगी कि काशीपुर बदल गया है, तभी उनका मन संतुष्ट होगा। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे तथ्यों के साथ सच्चाई जनता तक पहुंचाएं, ताकि भ्रम फैलाने वालों की मंशा सफल न हो।

व्यक्तिगत विरोध नहीं, संगठन को मजबूत करना उद्देश्य प्रेस वार्ता के प्रश्नोत्तर सत्र में महापौर ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी के व्यक्तिगत विरोध का नहीं, बल्कि संगठन और सरकार को मजबूत करने का है। उन्होंने कहा कि यदि अरविंद पांडे किसी के सुख-दुख में शामिल होने आते हैं, तो इसका स्वागत है, लेकिन यदि राजनीति करने की कोशिश होगी, तो विरोध भी होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी एक बड़ी संस्था है और समय आने पर संगठनात्मक कार्रवाई होगी। 4.5 वर्षों से चल रहे घटनाक्रमों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अब सब्र की सीमा समाप्त हो चुकी है।

भाजपा मां समान, रक्षा करना कर्तव्य अंत में दीपक बाली ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी उनके लिए एक मां समान है और मां को नुकसान पहुंचाने वालों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने अपील की कि यदि किसी को शिकायत है, तो सही मंच पर बात करे, सड़कों पर आंदोलन का रूप न दे। काशीपुर की जमीन कोई युद्ध का मैदान नहीं है, जहां बार-बार राजनीतिक गदर मचाया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश आगे बढ़ेगा और सभी षड्यंत्र विफल होंगे। प्रेस वार्ता का समापन इसी संदेश के साथ हुआ कि विकास, शांति और संगठनात्मक एकता ही उत्तराखंड की राजनीति का भविष्य तय करेगी।

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