


(कृष्णा वार्ता गदरपुर उत्तराखंड)
नई दिल्ली। सीबीएसई ने देशभर के सभी स्कूलों में तीसरी भाषा पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है। नए सर्कुलर के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक विदेशी भाषा पढ़ना जरूरी होगा। लेकिन इस फैसले को लेकर अब विरोध तेज हो गया है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
संसदीय स्थायी समिति (शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल) के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस नीति को फिलहाल रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मिड-सेशन में बिना पर्याप्त शिक्षक, किताबों और संसाधनों के इस नियम को लागू करना छात्रों और स्कूलों दोनों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि यह स्थिति पहले CBSE OSM सिस्टम लागू करने के दौरान हुई अफरा-तफरी जैसी हो सकती है। साथ ही सवाल उठाया गया है कि NCERT की गवर्निंग बॉडी की सिफारिशों के बावजूद CBSE ने अचानक यह सर्कुलर क्यों जारी किया।
सबसे ज्यादा असर दक्षिण और उत्तर-पूर्वी राज्यों के छात्रों पर पड़ने की आशंका जताई गई है, जहां भाषा चयन को लेकर पहले से चुनौतियां मौजूद हैं। वहीं संस्कृत और अन्य भाषाओं के लिए शिक्षकों व किताबों की कमी भी एक बड़ी समस्या बताई गई है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार और अदालत इस विवाद पर क्या फैसला लेती हैं, क्योंकि लाखों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य इससे जुड़ा हुआ है।
