चार जिलों के 76 संस्थानों को स्कूल के रूप में मिली मान्यता, शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के नियमों का पालन अनिवार्य
(कृष्णा वार्ता गदरपुर उत्तराखंड)
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गदरपुर खबर देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मान्यता प्राप्त मदरसों की शैक्षिक व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त मदरसों में अब शुक्रवार के स्थान पर रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखने के निर्देश दिए गए हैं। इन संस्थानों को शिक्षा विभाग और उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
सरकार के अनुसार, राज्य में मान्यता प्राप्त शैक्षिक संस्थानों में निर्धारित नियमों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था संचालित की जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें आगे की पढ़ाई और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
चार जिलों के 76 संस्थानों को मिली मान्यता
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, प्रदेश के चार जिलों में कुल 76 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता दी जा चुकी है। इनमें देहरादून के 6, हरिद्वार के 44, नैनीताल के 2 और ऊधमसिंह नगर के 24 संस्थान शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि मान्यता प्राप्त संस्थानों को साप्ताहिक अवकाश सहित शैक्षिक संचालन से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। आवश्यक मान्यता और अनुमति के बिना किसी संस्थान का संचालन नहीं किया जा सकेगा।
सभी मान्यता प्राप्त संस्थानों पर लागू होंगे निर्धारित नियम : धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार सभी बच्चों को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त स्कूलों के रूप में संचालित होने वाले मदरसों पर भी विभाग के निर्धारित नियम लागू होंगे।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़कर राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मान्यता प्राप्त संस्थानों के लिए निर्धारित शैक्षिक मानकों और नियमों का पालन अनिवार्य होगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।








