(krishna varta gadarpur uttarakhand)
गदरपुर। गदरपुर तहसील में प्रमाण-पत्रों को लेकर सामने आए कथित फर्जीवाड़े ने प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। मामला सिर्फ प्रमाण-पत्र बनवाने तक सीमित नहीं बताया जा रहा, बल्कि जांच में इन दस्तावेजों का इस्तेमाल NEET के बाद MBBS में प्रवेश के लिए किए जाने की बात सामने आई है।
प्रशासन की जांच में कूटरचित अभिलेखों के आधार पर बनाए गए बताए जा रहे स्थायी निवास, जाति और अन्य प्रमाण-पत्रों को लेकर कार्रवाई की गई है। अब तक पांच व्यक्तियों से संबंधित स्थायी एवं अनाथ प्रमाण-पत्र निरस्त किए गए हैं। जाति प्रमाण-पत्रों के मामले में जिला स्क्रूटनी समिति को नियमानुसार संस्तुति भेजी गई है।
मामले में जांच का दायरा बढ़ाते हुए दो युवको से गहन पूछताछ की गई। दोनों के बयान दर्ज किए गए। प्रशासन के मुताबिक, उनके मोबाइल फोन भी कब्जे में लिए गए, जिनमें मामले से संबंधित रिकॉर्डिंग और दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है।
इसके बाद मोबाइल फोन आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंपे गए और मामले में FIR दर्ज कराई गई।
देर रात तक खंगाले गए दस्तावेज
प्रशासनिक टीम ने मामले से जुड़े अभिलेखों की जांच और पूछताछ की कार्रवाई देर रात तक जारी रखी। अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई रात से शुरू होकर लगभग सुबह 3 बजे तक चली।
पूरी कार्रवाई एसडीएम डॉ. अमृता शर्मा, तहसीलदार लीना चंद्रा धामी, राजस्व निरीक्षक विनोद कुमार सहित राजस्व कर्मचारियों और पटवारियों की मौजूदगी में की गई।
प्रमाण-पत्र निरस्त होने और FIR दर्ज होने के बाद अब जांच की दिशा इस बात पर भी रहेगी कि कथित कूटरचित दस्तावेज किस तरह तैयार हुए, किन अभिलेखों का इस्तेमाल किया गया और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं
प्रशासन ने साफ किया है कि जांच में यदि अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
गदरपुर तहसील से सामने आया यह मामला अब सिर्फ कुछ प्रमाण-पत्रों तक सीमित नहीं, बल्कि कथित तौर पर मेडिकल प्रवेश में इनके इस्तेमाल के आरोपों तक पहुंच गया है। जांच आगे बढ़ने के साथ कई और तथ्य सामने आने की संभावना है।








