(कृष्णा वार्ता गदरपुर उत्तराखंड)
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गदरपुर खबर। तहसील गदरपुर क्षेत्र में कूटरचित अभिलेखों के आधार पर स्थायी निवास, जाति समेत अन्य प्रमाण-पत्र बनवाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। प्रथम दृष्टया फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाण-पत्र तैयार कराए जाने के तथ्य सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरोप है कि इन प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल एमबीबीएस में प्रवेश के लिए किया जाना था।
उप जिलाधिकारी अमृता शर्मा और तहसीलदार लीना चंद्रा धामी के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों की गहनता से जांच की। कार्रवाई गुरुवार देर रात करीब ढाई बजे तक तहसील परिसर में चलती रही। अधिकारियों ने संबंधित फाइलों और रिकॉर्ड को खंगालते हुए एक-एक अभिलेख की पड़ताल की।
जांच पूरी होने के बाद दोनों आरोपी शुभम और निखिल वर्मा को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। प्रशासन की कार्रवाई के बाद कूटरचित दस्तावेजों के जरिए सरकारी प्रमाण-पत्र हासिल करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।
वहीं, मामले में प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया और राजस्व स्तर पर हुए सत्यापन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर प्रमाण-पत्र जारी होने से पहले संबंधित अभिलेखों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया और जांच के दौरान कथित गड़बड़ी सामने क्यों नहीं आई।
प्रशासन ने प्रमाण-पत्र बनवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन अब उन कर्मचारियों की भूमिका की जांच भी अहम मानी जा रही है, जिनके स्तर से दस्तावेजों का सत्यापन और रिपोर्ट तैयार की गई थी। संबंधित हल्का पटवारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रशासनिक टीम देर रात तक तहसील कार्यालय में दस्तावेज और रिकॉर्ड खंगालती रही। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी अभिलेखों में कूटरचना अथवा जालसाजी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच में यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।








