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गदरपुर विधानसभा राजा जगत ‌देव स्थल पर 26 दिसंबर से लगेगा विशाल मेला
कृष्ण वार्ता गदरपुर उत्तराखंड
9917322413


गदरपुर विधानसभा में 26 दिसंबर से लगेगा विशाल मेला

पिछले 5 वर्षों से लग रहा विशाल मेला,हर वर्ष मेले का बढ़ रहा स्वरूप, श्रद्धालुओं की संख्या आश्चर्य चकित रूप से हो रहा इजाफा

गदरपुर। श्रद्धेय राजा जगत देव जी केवल मालवा या परमार वंश तक सीमित व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि उनका यश और प्रभाव उत्तर भारत की लोक चेतना में दूर-दूर तक फैला हुआ है। उत्तराखंड, विशेषकर कुमाऊँ और गढ़वाल अंचल में, राजा जगत देव जी को साहस, बलिदान और धर्मरक्षा के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है। यहां की लोकपरंपराओं में उन्हें न्याय के देव और रक्षक शक्ति के रूप में देखा जाता है।
गदरपुर विधानसभा की रोशनपुर ग्राम सभा के अंतर्गत गांव डलपुरा में पिछले 5 वर्षों से यानी 2021 से प्रत्येक वर्ष श्रद्धेय राजा जगत देव जी की जयंती पर मेला आयोजित होता है और प्रत्येक वर्ष इसका स्वरूप बढ़ता जा रहा है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है।  यह मेला बुक्सा समाज के द्वारा आयोजित होता है। मेले के साथ-साथ बुक्सा समाज के लोगों द्वारा यहां एक विशाल बॉलीबॉल टूर्नामेंट का भी आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी यह विशाल मेला कल यानी 26 दिसंबर से शुरू हो रहा है।
लोकमान्यताओं के अनुसार, जब भी समाज पर संकट आया या नारी सम्मान और गौ रक्षा पर आघात हुआ, तब राजा जगत देव जी जैसे वीरों के आदर्श उत्तराखंड की देवभूमि में प्रेरणा बने। पर्वतीय समाज में उनकी कथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक परंपरा के माध्यम से सुनाई जाती रही है, जहां त्याग और शौर्य को देवतुल्य गुण माना जाता है।  लोगों में खेल रुचि के चलते बुक्सा समाज के लोग नशे से दूर है। उत्तराखंड की सनातन संस्कृति में शीशदान, धर्मरक्षा और गौ संरक्षण को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यही कारण है कि राजा जगत देव जी का व्यक्तित्व यहां के लोकदेवताओं और वीर गाथाओं की परंपरा से आत्मिक रूप से जुड़ता है। कई स्थानों पर जागरणों और धार्मिक आयोजनों में उनके नाम का स्मरण कर समाज की रक्षा और सद्बुद्धि की कामना की जाती है।

राजा जगत देव जी का जीवन उत्तराखंड के युवाओं के लिए यह संदेश देता है कि वीरता केवल हथियार उठाने में नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और मानवीय मूल्यों की रक्षा में निहित होती है। देवभूमि की आत्मा में बसे त्याग, शौर्य और सेवा के संस्कारों से उनका व्यक्तित्व स्वाभाविक रूप से मेल खाता है।
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