





(कृष्णा वार्ता गदरपुर उत्तराखंड)

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गदरपुर। खबर ग्रीष्मकालीन धान पर सरकार द्वारा लगाई गई रोक को लेकर किसानों में गहरा असंतोष व्याप्त है। भारतीय किसान यूनियन के युवा ब्लॉक अध्यक्ष गदरपुर हरपाल सिंह विर्क ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर पुनर्विचार की मांग की है। ज्ञापन जिलाधिकारी उधमसिंह नगर के माध्यम से भेजा गया।
युवा ब्लॉक अध्यक्ष हरपाल सिंह विर्क ने बताया कि जनपद उधमसिंहनगर तराई क्षेत्र में स्थित है, जहां पानी की कोई कमी नहीं है। जिले में अनेक डैम स्थित हैं, जिनमें वर्षा के दौरान पहाड़ों से आने वाला पानी एकत्र हो जाता है। इसी पानी के सहारे किसान धान की फसल उगाते हैं और बोरिंग व नलकूप का कम उपयोग करते हैं, जिससे बिजली बिल का खर्च भी कम आता है। उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही आर्थिक दबाव में हैं और अधिक बिजली बिल वहन करने में असमर्थ हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जसपुर से खटीमा तक अधिकतर भूमि निचली एवं नमीयुक्त है, जहां गेहूं की फसल ठीक प्रकार से नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में किसान धान की खेती पर निर्भर हैं। कई किसान स्वयं धान की पौध (पनीरी) तैयार नहीं कर पाते, इसलिए वे अन्य किसानों से पौध खरीदकर अपने खेतों में रोपाई करते हैं।
हरपाल सिंह विर्क ने कहा कि यदि प्रशासन द्वारा तैयार की गई धान की पौध को ही नष्ट कर दिया जाएगा, तो नमी वाली भूमि पर धान लगाने की अनुमति का लाभ किसान कैसे उठा पाएंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उधमसिंहनगर से मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों के किसानों को भी धान की पौध उपलब्ध कराई जाती है, क्योंकि वहां पर्याप्त पानी के अभाव में पौध तैयार करना संभव नहीं हो पाता।
अंत में युवा ब्लॉक अध्यक्ष हरपाल सिंह विर्क ने मुख्यमंत्री से मांग की कि तराई क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ग्रीष्मकालीन धान पर लगाई गई रोक पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि किसानों की आजीविका प्रभावित न हो। हैप्पी विर्क हरप्रीत सिंह नज्जर हरविंदर सिंह संधू धर्मपाल कंबोज आदि सैकड़ो किसान मौजूद रहे

