



(कृष्णा वार्ता गदरपुर उत्तराखंड)
मथुरा।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यूपी के तीन दिवसीय दौरे के अंतिम दिन शनिवार को मथुरा के गोवर्धन में गिरिराज जी के चरणों में शीश नवाया। भक्ति और सादगी के संगम के साथ राष्ट्रपति ने न केवल दानघाटी मंदिर और मुकुट मुखारविंद मन्दिर में विशेष पूजा-अर्चना की, बल्कि गोवर्धन पर्वत की 21 किलोमीटर की परिक्रमा कर एक नया इतिहास भी रच दिया। वह देश की पहली ऐसी राष्ट्रपति बन गई हैं जिन्होंने गोवर्धन धाम पहुंचकर गिरिराज महाराज के दर्शन किए हैं।
शनिवार सुबह करीब 8:30 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू वृंदावन के होटल रेडिसन से सीधे गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर पहुंचीं। उनके साथ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहीं। मंदिर परिसर में राष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने पूर्ण विधि-विधान के साथ भगवान गिरिराज जी का दूध से अभिषेक किया और फल-मिष्ठान का भोग लगाया। इस दौरान मंदिर को विशेष रूप से रंग-बिरंगे फूलों और लाइटों से सजाया गया था।
21 किलोमीटर की ‘डिजिटल’ और पैदल परिक्रमा
पूजा-अर्चना के पश्चात राष्ट्रपति ने गोवर्धन की 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा शुरू की। श्रद्धा भाव प्रकट करते हुए वह कुछ दूर पैदल चलीं, जिसके बाद सुरक्षा और समय की मर्यादा को देखते हुए उन्होंने परिवार के साथ गोल्फ कार्ट का उपयोग किया। परिक्रमा को पूरा करने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लगा। पूरी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने हाथ जोड़कर वहां मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। इस अवसर पर स्थानीय सांसद हेमा मालिनी भी उनके साथ मौजूद रहीं।
इतिहास में दर्ज हुआ गोवर्धन आगमन
राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा ऐतिहासिक रहा क्योंकि इससे पहले किसी भी राष्ट्रपति ने गोवर्धन की परिक्रमा नहीं की थी। प्रशासन ने इस यात्रा को यादगार बनाने के लिए पूरे क्षेत्र को ‘दुल्हन’ की तरह सजाया था। प्रमुख चौराहों पर रंगोली और विशेष सजावट की गई थी। परिक्रमा और पूजन संपन्न करने के बाद राष्ट्रपति वायुसेना के विशेष हेलीकॉप्टर से दिल्ली के लिए रवाना हो गईं।
तीन दिवसीय यूपी दौरा: अयोध्या से मथुरा तक
राष्ट्रपति का यह मथुरा का दूसरा दौरा था। इससे पहले वह 25 सितंबर, 2025 को बांके बिहारी मंदिर आई थीं। गुरुवार को उन्होंने अयोध्या में रामलला के दर्शन और आरती की थी। शुक्रवार को वृंदावन में प्रेमानंद महाराज से मुलाकात और फिर शनिवार को गोवर्धन परिक्रमा के बाद दिल्ली वापस लौट गईं।
