Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
कल तक आमने-सामने खड़े तराई के दो शेर, आज एक मंच पर गरजते नजर आए—तराई से 2027 चुनावी जंग का बिगुल!
(कृष्णा वार्ता गदरपुर उत्तराखंड)
(9917322413)


रुद्रपुर/किच्छा/ गदरपुर। राजनीति में कुछ दृश्य ऐसे होते हैं जो बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह जाते हैं। किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ के जन्मदिन पर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल द्वारा भेंट की गई तलवार भी ऐसा ही एक प्रतीकात्मक दृश्य बनकर सामने आया है। यह तलवार अब सिर्फ एक उपहार नहीं, बल्कि तराई की राजनीति में उभरती नई सियासी हलचल का संकेत मानी जा रही है।
पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें पहले से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रही हैं। ऐसे में बेहड़ के जन्मदिन समारोह में उनकी मौजूदगी और तलवार भेंट करने की घटना को सामान्य नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट है, जहां तराई क्षेत्र में पुराने सियासी खिलाड़ी नए समीकरणों के साथ सक्रिय होते दिख रहे हैं।
यदि 2022 के विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो तराई का राजनीतिक मिजाज साफ झलकता है। उधम सिंह नगर जिले की 9 सीटों में से कांग्रेस ने 5 पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को 4 सीटों से संतोष करना पड़ा था। खटीमा सीट से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की हार ने यह स्पष्ट कर दिया था कि तराई की राजनीति अब किसी एक दल की पकड़ में नहीं रही।
अब जैसे-जैसे 2027 का चुनावी सफर करीब आ रहा है, तराई एक बार फिर सियासी रणभूमि बनती नजर आ रही है। कांग्रेस खेमे में यदि राजकुमार ठुकराल जैसे प्रभावशाली चेहरे की एंट्री होती है, तो इसे पार्टी के लिए बड़ी मजबूती माना जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा के भीतर भी संभावित असंतोष के सुर सुनाई देने लगे हैं। गदरपुर से भाजपा नेता अरविंद पांडे को टिकट न मिलने की स्थिति में बगावती रुख की चर्चाओं ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
राजनीति में संकेतों की भाषा अक्सर घोषणाओं से अधिक प्रभावशाली होती है। बेहड़ के जन्मदिन पर भेंट की गई तलवार भी यही संदेश दे रही है कि तराई की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। यह मोड़ किसके पक्ष में जाएगा, यह भविष्य तय करेगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है।
भले ही यह आयोजन एक जन्मदिन समारोह था, लेकिन इसके भीतर छुपे सियासी संकेतों ने साफ कर दिया कि आने वाले चुनाव की तैयारी अब केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगी है। तराई से उठी यह सियासी आहट कितनी दूर तक जाएगी, इसका जवाब समय देगा, मगर इतना कहना गलत नहीं होगा कि बेहड़ के जन्मदिन ने 2027 की चुनावी जंग का बिगुल जरूर बजा दिया है।
Advertisement
Advertisement