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(कृष्णा वार्ता गदरपुर उत्तराखंड)

देहरादून। उत्तराखंड में कल से ई-डिटेक्शन (e-Detection) प्रणाली लागू होने वाली है, जिसके तहत सीमा में घुसते ही वाहन के दस्तावेज खुद जांचे जाएंगे और कमी मिलने पर ऑटोमैटिक ई-चालान कट जाएगा। अब सड़कों पर बिना परमिट, बिना बीमा और बिना फिटनेस वाले वाहनों की पहचान बिना उन्हाेंने रोके ही हो सकेगी।

ई-डिटेक्शन एक मॉडर्न डिजिटल निगरानी सिस्टम है, जो FASTag और वाहन नंबर के जरिए टोल प्लाजा से गुजरते ही वाहन को पहचान लेता है। इसके बाद भारत सरकार के परिवहन मंत्रालय के राष्ट्रीय डाटाबेस (VAHAN) से रियल-टाइम कनेक्ट होकर यह जांच करता है कि वाहन के जरूरी कागज वैध हैं या नहीं।

किन कागजों की होगी जांच?

प्रथम चरण में ई-डिटेक्शन सिस्टम इन दस्तावेजों की जांच करेगा-

परमिट

बीमा प्रमाणपत्र

फिटनेस सर्टिफिकेट

प्रदूषण प्रमाणपत्र

रोड टैक्स

अगर इनमें से कोई भी दस्तावेज एक्सपायर, अवैध या मौजूद नहीं पाया गया, तो वाहन को डिफॉल्टर घोषित कर दिया जाएगा।

15 साल से पुराने वाहन भी रडार पर

यह सिस्टम 15 साल या उससे अधिक पुराने वाहनों की भी पहचान करेगा, खासतौर पर उन वाहनों की जिनका आरसी नवीनीकरण या फिटनेस समय पर नहीं कराया गया है।

कहां-कहां होगी ई-निगरानी?

राज्य में फिलहाल 7 प्रमुख टोल प्लाजा को ई-डिटेक्शन सिस्टम से जोड़ा गया है।

1. बहादराबाद टोल प्लाजा, हरिद्वार 2. भगवानपुर टोल प्लाजा, हरिद्वार 3. लच्छीवाला टोल प्लाजा, देहरादून 4. जगतापुर पट्टी टोल प्लाजा, ऊधमसिंह नगर 5. बनुषी टोल प्लाजा, ऊधमसिंह नगर 6. नगला टोल प्लाजा, ऊधमसिंह नगर 7. देवरिया टोल प्लाजा, ऊधमसिंह नगर

उल्लंघन हुआ तो क्या होगा?

दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलते ही ऑटोमैटिक ई-चालान जनरेट होगा।

वाहन मालिक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS पहुंचेगा।

चालान की राशि, उल्लंघन का प्रकार और ऑनलाइन भुगतान लिंक मिलेगा।

भुगतान echallan.parivahan.gov.in या दिए गए डिजिटल लिंक से किया जा सकेगा।

ट्रायल में पकड़े गए 1569 डिफॉल्टर वाहन

उप परिवहन आयुक्त शैलेश कुमार तिवारी के मुताबिक, 17 जनवरी को इस सिस्टम का मैनुअल ट्रायल किया गया। एक ही दिन में 7 टोल से 49,060 वाहनों का डेटा सिस्टम को मिला। इनमें से 1569 वाहन ऐसे पाए गए, जिनके परमिट और फिटनेस समाप्त हो चुके थे।

वाहन डाटाबेस से मिलान के बाद ट्रायल पूरी तरह सफल पाया गया। इसके बाद फैसला लिया गया कि 19 जनवरी 2026 से सिस्टम को ऑटो मोड में लागू कर दिया जाए।

क्यों खास है यह व्यवस्था?

सड़क पर वाहन रोककर जांच की जरूरत नहीं

ट्रैफिक जाम से राहत

मानवीय हस्तक्षेप और पक्षपात की गुंजाइश खत्म

केवल सुरक्षित और वैध वाहन ही सड़कों पर चलेंगे

दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद

सबसे खास बात यह प्रणाली पहले ही ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में प्रभावी रूप से लागू की जा चुकी है। केंद्र सरकार ने भी राज्यों को इसे अपनाने के निर्देश दिए हैं।


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कृष्णा वार्ता, गदरपुर

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